Meghdootam

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मेघदूतम् 

व्याख्याकार: 
डॉ. दयाशंकर शास्त्री

‘स्त्रीणामाद्यं प्रणयवचनं विश्वमो हि प्रियेषु’

‘मेघदूतम्’ नामक गीतिकाव्य के रचयिता कालिदास हैं।

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Description

मेघदूतम् 

व्याख्याकार: 
डॉ. दयाशंकर शास्त्री

‘स्त्रीणामाद्यं प्रणयवचनं विश्वमो हि प्रियेषु’

  • ‘मेघदूतम्’ नामक गीतिकाव्य के रचयिता कालिदास हैं। कालिदास संस्कृत साहित्य अथवा भारत के ही महाकवि नहीं हैं अपितु साहित्यविशेष एवं देशविशेष की सीमाओं को लाँघकर विश्व के सहृदयों के हृदयों पर अधिकार प्राप्त कर चुके हैं। व्यों ज्यों इस महाकवि की कृतियों का अनुशीलन होता जाता है त्यों-त्यों इसकी प्रतिभा एवं सकल कृतित्व का ज्ञान बढ़ता जाता है । कालिदास की कृतियों का जितना अनुशीलन हो चुका है उसे हम पर्याप्त नहीं कह सकते | काव्यशास्त्र पर आधारित स्वस्थ समालोचना द्वारा ही इस महाकवि की अजर-अमर कृतियों का मूल्याङ्कन संभव है। इस प्रशस्य प्रयास के निमित्त विद्वत्समुदाय की सम्मिलित चेष्टा अपेक्षित है।
  • कालिदास का जीवनवृत्त – महाकवि कालिदास का जीवनवृत्त अज्ञाना न्धकार के पटलों में दब गया है। संभावना यही है कि दवा ही रहेगा। परिपुष्ट प्रमाणों के अभाव में कितनी ही कहानियाँ गढ़ कर कालिदास के सिर थोप दी गई हैं।
  • इन्हीं कल्पित कथाओं में से एक कथा के अनुसार कालिदास पहले एक निरे मूर्ख आदमी थे। राजा शारदानन्द की एक कुमारी पुत्री थी। नाम था उसका विद्योत्तमा | विद्वत्ता के गर्व एवं अनिन्य सौन्दर्य का अपूर्व संयोग था उसमें उसकी प्रतिज्ञा थी कि जो व्यक्ति शास्त्रार्थ में उसे परास्त कर देगा उसी को वह पतिरूप में वरण करेगी। विद्योत्तमा की विद्वत्ता के आगे बड़े-बड़े शास्त्रार्थी पण्डित भी मात खा गये । अतः पण्डितों ने ईर्ष्यावश् षडयंत्र करके वियोत्तमा का विवाह किसी अतिमूर्ख व्यक्ति के साथ करा देने की ठान ली।

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