Meghdutam-Uttarmegh

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मेघदूतम्

  • उत्तरमेघ
  • कालिदास की प्रशंसा
  • संस्कृत टीका , हिन्दी तथा अंग्रेजी अनुवाद , विस्तृत टिप्पणी और सर्वपूर्ण भूमिका से संवलित
  • प्रणेता
  • तारिनिश झा
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मेघदूतम्

  • उत्तरमेघ
  • कालिदास की प्रशंसा
  • संस्कृत टीका , हिन्दी तथा अंग्रेजी अनुवाद , विस्तृत टिप्पणी और सर्वपूर्ण भूमिका से संवलित
  • प्रणेता
  • तारिनिश झा
  • गीतिकाव्यों, विशेषकर दूतकाव्यों में कालिदास का मेघदूत सर्वश्रेष्ठ है । इसको मेघसन्देश भी कहते हैं। इसमें दो प्रकरण हैं–पूर्वमेघ और उत्तरमेघ । पूर्वमेघ में ६७ तथा उत्तरमेघ में ५४ श्लोक प्राप्त होते हैं। इस प्रकार इस काव्य में कुल मिलाकर १२१ श्लोक हो जाते हैं। इसकी कई प्रतियों में कुछ कम पा अधिक भी श्लोक मिलते हैं। प्रकृत संस्करण में अधिक ही रखे गये हैं।
  • महाकवि कालिदास सरस्वती के अमर पुत्र तथा सुरभारती के सनातन शृंगार हैं। केवल भारतीय साहित्य में ही नहीं, अपितु विश्व साहित्य में उनका द्वितीय स्थान है। उनका साहित्य एक ऐसी अनुपम रत्न-राशि है, जिसमें से भाषा, भाव तथा कल्पना के अमूल्य रत्नों को लेकर परवर्ती साहित्यकारों ने अपनी कला को अलंकृत तथा काव्य-सम्पदा को समृद्ध बनाया है। क्या देशी क्या विदेशी सभी विद्वानों एवं कवियों ने इस रससिद्ध कवीश्वर की भूरि-भूरि प्रशंसा की है । जर्मनी के प्रसिद्ध कवि गेटे ने कालिदास की अन्यतम नाट्य कृति ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ को पढ़कर आनन्दविह्वल होकर जो शब्द कहे हैं, वे अत्यन्त मर्मस्पर्शी है ।

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