Vedantasar

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वेदांतसारः
हिन्दी व्याख्याकरः 
डॉ. सन्तनारायण श्रीवास्तव

हिन्दी रूपांतरण तत्वपारिजाताख्यहिन्दीव्याख्या – संवलितः

श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यसदानन्दयोगीन्द्रविरचितः

 

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वेदांतसारः

हिन्दी व्याख्याकरः 
डॉ. सन्तनारायण श्रीवास्तव

हिन्दी रूपांतरण तत्वपारिजाताख्यहिन्दीव्याख्या – संवलितः

श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यसदानन्दयोगीन्द्रविरचितः

  • प्रो० सन्तनारायण श्रीवास्तव्य प्रयोग विश्वविद्यालयके लक्ष्यप्रतिष्ठ संस्कृताध्यापक तथा उच्च श्रेणी के दर्शनविद् हैं। इन्होंने अपने अध्ययन इन पङ्क्तियोंके लेखकसे काव्य-दर्शन-व्याकरणादिका तथा विशेष वेदान्तके कतिपय उच्चकोटिक ग्रन्थोका, एवन्ध कालाज, निम्बत और मीमांसा इत्यादिका सम्यग् ज्ञान प्राप्त करके दीर्घकालीन अनुशीलन, प्रौढ विचार तथा आचरणके द्वारा अपनी विद्याको परिपका किया है। ये सुदीर्घकालसे शाडूरवेदान्तका अध्यापन भी करते आ रहे है। अतएव अद्वैतवेदान्तके विशेषज्ञ और अनुभवी विद्वान् होने के कारण व्यापक अधिकार के साथ, इन्होंने सदानन्दप्रणीत वेदान्तसारघर “तत्यपारिजात नामी वैदुष्यपूर्ण विस्तृत व्याख्या के द्वारा वेदान्तदर्शनमें गम्भीर चिन्तनक नवदिगन्तोको समुन्मीलित करनेवाला अतिशय उपयोगी कार्य प्रारम्भ किया है। उपलब्ध सामग्रीका विवेकपूर्ण उपयोग करके, तथा जो स्थल पूर्ववर्ती व्याख्याकारों के द्वारा अस्पृष्ट थे अथवा जिनकी व्याख्या अपूर्ण अपर्याप्त एवं सन्दिग्ध थी, उन स्थलोका विचारपूर्ण विशद और सुबोध विवेचन करके विचारोबोधक व्याख्याके क्षेत्र में इन्होंने नवीन आदर्शों और मानदण्डोको स्थापनाका स्पृहणीय प्रयास किया है।
  • वेदान्त-प्रविविक्षु और उक्त ग्रन्थविशेषके अधिजिगमिषु जनाको दृष्टिमें रखते हुए इन उदीयमान प्रतिभासम्पन्न व्याख्याकारने अपनी व्याख्या में कोई भी न्यूनता न रहने देने की पूर्ण चेष्टा की है। यत्र-तत्र व्याख्याकारने विषयबोधकी दृष्टिसे सर्वथा मौलिक उद्भावनाएँ प्रस्तुत की है, जो अद्वैतसिद्धान्त के साथ सम्पूर्णतया समरस तो है ही, साथ ही उसकी निरवद्यताको अधिकाधिक परिपुष्ट करनेवाली है। इच्छा तो थी कि व्याख्याकारके द्वारा प्रस्तुत मार्मिक स्थलोंकी हृदयग्राही व्याख्यासे कतिपय उदाहरणोंका भी उल्लेख कर दिया। जाय, परन्तु इस सङ्क्षिप्त परिचयमें स्थानाभावके कारण उसकी पूर्ति करनेका विचार छोड़ना पड़ा। आशा है कि इस व्याख्या के गुणग्राही पाठकवृन्दकी दृष्टि उन स्थलों की ओर स्वतः ही आकृष्ट होगी।

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